शांति समझौतों और युद्धविराम की तमाम कोशिशों के बीच गाजा पट्टी से तबाही की खबरें आना थम नहीं रही हैं। सेंट्रल गाजा में एक बार फिर आसमान से बरसी मिसाइलों ने आम लोगों की जिंदगी को मलबे में तब्दील कर दिया है। हाल ही में मध्य गाजा के एक रिहायशी इलाके को निशाना बनाकर की गई इजरायली एयरस्ट्राइक में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब विस्थापित हो चुके लोग सुरक्षा की तलाश में एक से दूसरी जगह भटक रहे हैं।
घटना के तुरंत बाद मलबे से चीख-पुकार और अपनों को तलाशते लोगों की तस्वीरें सामने आईं। इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गाजा में अब कोई भी कोना सुरक्षित नहीं बचा है।
सेंट्रल गाजा में आखिर क्या हुआ?
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, हमला सेंट्रल गाजा के एक बेहद घने रिहायशी इलाके में मौजूद बहुमंजिला इमारत पर हुआ। बिना किसी पुख्ता चेतावनी के हुए इस अचानक हमले ने इमारत को पूरी तरह जमींदोज कर दिया।
- जान-माल का नुकसान: हमले में अब तक तीन लोगों के शव मलबे से निकाले जा चुके हैं। घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि मलबे के नीचे अभी भी लोगों के दबे होने की आशंका है।
- अस्पतालों की बदहाली: घायलों को तुरंत पास के अल-अक्सा शहीद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, गाजा के अस्पताल पहले से ही जरूरी दवाओं, बिजली और डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं, जिसके कारण घायलों का इलाज करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
- हमले का मकसद: इजरायली सेना का हमेशा की तरह दावा है कि वे हमास या अन्य चरमपंथी संगठनों के ठिकानों और उनके कमांडरों को निशाना बना रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन हमलों का सबसे बड़ा खामियाजा बेकसूर नागरिकों, महिलाओं और मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने के पीछे की रणनीति
यह कोई पहला मामला नहीं है जब इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने किसी रिहायशी इमारत को निशाना बनाया हो। पिछले कई महीनों से चल रहे इस संघर्ष में गाजा की बड़ी इमारतों और रिहायशी परिसरों को मलबे के ढेर में बदल दिया गया है। इसके पीछे इजरायल का तर्क है कि चरमपंथी गुट आम लोगों के घरों, स्कूलों और अस्पतालों को ढाल की तरह इस्तेमाल करते हैं।
लेकिन मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की अंधाधुंध बमबारी से केवल मानवीय संकट गहरा रहा है। लोग बुनियादी सुविधाओं जैसे पानी, भोजन और इलाज के लिए तरस रहे हैं।
क्या युद्धविराम की कोशिशें केवल कागजों पर हैं?
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार युद्धविराम की अपील की जाती रही है। संयुक्त राष्ट्र (UN) से लेकर तमाम बड़े देश इस संघर्ष को रोकने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें कर रहे हैं। लेकिन जमीन पर इन अपीलों का कोई असर होता नहीं दिख रहा।
बदले की इस अंतहीन आग में दोनों तरफ से हमले जारी हैं, लेकिन सैन्य रूप से कमजोर होने के कारण गाजा के नागरिकों को इसकी सबसे भयानक कीमत चुकानी पड़ रही है। हर गुजरते दिन के साथ यहां मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है, और बचे हुए लोग बेहद अमानवीय परिस्थितियों में जीने को मजबूर हैं।
विश्व समुदाय के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक निर्दोष लोगों की जान की कीमत पर यह सैन्य अभियान चलता रहेगा। अगर समय रहते कोई ठोस और व्यावहारिक शांति समझौता लागू नहीं किया गया, तो मध्य पूर्व का यह संकट पूरी मानवता के माथे पर एक गहरा कलंक बनकर रह जाएगा।