स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में फ्रांस और ब्रिटेन ने अपने माइन-स्वीपिंग (सुरंग रोधी) युद्धपोत भेज दिए हैं। मुख्यधारा का मीडिया इसे एक "बड़ा एक्शन" और वैश्विक व्यापार को बचाने वाला कदम बता रहा है। रक्षा विशेषज्ञ टीवी स्टूडियो में बैठकर नक्शों पर उंगलियां घुमा रहे हैं। नैरेटिव सेट किया जा चुका है कि पश्चिमी नौसेनाएं आकर इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित कर देंगी।
यह पूरा नैरेटिव पूरी तरह से गलत, पुराना और जमीनी हकीकत से कटा हुआ है।
सच्चाई यह है कि खाड़ी में पारंपरिक माइन-स्वीपिंग जहाजों को भेजना 1980 के दशक की रणनीति है जिसे 2026 के ड्रोन युग में थोपा जा रहा है। फ्रांस और ब्रिटेन का यह कदम कोई मास्टरस्ट्रोक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक लाचारी है। वे एक ऐसी समस्या का समाधान पुराने तरीकों से कर रहे हैं जो अब पूरी तरह बदल चुकी है।
20वीं सदी के खिलौने और 21वीं सदी का खतरा
लॉजिस्टिक्स और नौसैनिक रणनीतियों को करीब से देखने वाले जानते हैं कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की चौड़ाई सबसे संकीर्ण बिंदु पर सिर्फ 21 मील (लगभग 33 किलोमीटर) है। इसमें से भी जहाजों के आने-जाने के लिए केवल दो-दो मील के दो शिपिंग लेन उपलब्ध हैं।
मीडिया आपको विश्वास दिलाना चाहता है कि फ्रांस का एरिडाने क्लास या ब्रिटेन का हंट क्लास माइनहंटर वहां जाकर समुद्र को साफ कर देगा। लेकिन वे इस बात को छुपा जाते हैं कि आधुनिक नौसैनिक युद्ध अब बदल चुका है।
- असममित युद्ध (Asymmetric Warfare): आज का असली खतरा उन समुद्री बारूदी सुरंगों (mines) से नहीं है जो द्वितीय विश्व युद्ध के समय से पानी में तैर रही हैं। असली खतरा स्मार्ट माइन्स, रिमोट-कंट्रोल्ड आईईडी और पानी के नीचे चलने वाले सुसाइड ड्रोन्स (UUVs) से है।
- दूरी की विफलता: जब आप एक धीमे, कम बख्तरबंद वाले माइन-स्वीपर को ईरान के तट से महज कुछ मील की दूरी पर तैनात करते हैं, तो आप उसे एक आसान निशाना बना रहे होते हैं। तट पर बैठी एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें और झुंड में हमला करने वाली स्पीडबोट्स (Swarm Drones) इन जहाजों को मलबे में बदलने के लिए काफी हैं।
मैंने सालों तक समुद्री सुरक्षा के बजट और रणनीतियों को देखा है। सरकारें लाखों डॉलर के इन जहाजों को सिर्फ यह दिखाने के लिए भेजती हैं कि "हम कुछ कर रहे हैं।" यह रक्षा नीति नहीं, यह केवल पीआर (जनसंपर्क) है।
उस नैरेटिव को खारिज करें जो आपको बेचा जा रहा है
अक्सर लोग पूछते हैं: "अगर पश्चिमी देश वहां जहाज नहीं भेजेंगे, तो तेल की सप्लाई रुक जाएगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी?"
यह डर पैदा करने की एक कला है। आइए इस दावे की धज्जियां उड़ाते हैं।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को पूरी तरह से ब्लॉक करना ईरान के लिए भी आत्मघाती होगा। ईरान की खुद की अर्थव्यवस्था इसी रास्ते से होने वाले व्यापार पर टिकी है। चीन, जो ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, कभी नहीं चाहेगा कि यह रास्ता बंद हो। पश्चिमी देश वहां सुरक्षा का नाटक कर रहे हैं, जबकि असली नियंत्रण बीजिंग के राजनयिक दबाव और क्षेत्र के भू-राजनीतिक संतुलन से तय होता है।
जब ब्रिटेन और फ्रांस अपने जहाजों को वहां भेजते हैं, तो वे तनाव को कम नहीं करते, बल्कि उसे भड़काते हैं। एक भी गलतफहमी या एक छोटा सा ड्रोन हमला पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है। क्या दो माइन-स्वीपर जहाज इस बड़े खतरे की कीमत के बराबर हैं? बिल्कुल नहीं।
क्या वाकई कोई विकल्प है?
अगर पारंपरिक माइन-स्वीपिंग एक धोखा है, तो समाधान क्या है? उद्योग जगत के समझदार खिलाड़ी जानते हैं कि सुरक्षा अब जहाजों को पानी में उतारने से नहीं आती।
- व्यापार मार्गों का विविधीकरण: सऊदी अरब की 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' और यूएई की 'फुजैराह पाइपलाइन' पहले से मौजूद हैं। इनका इस्तेमाल हॉर्मुज को पूरी तरह से बायपास करने के लिए किया जा सकता है। निवेश जहाजों पर नहीं, इस इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता बढ़ाने पर होना चाहिए।
- स्वायत्त अंडरवाटर तकनीक (Autonomous Tech): अगर समुद्र में सुरंगों का पता लगाना ही है, तो इंसानी जान और महंगे युद्धपोतों को दांव पर लगाने की जरूरत नहीं है। छोटे, सस्ते और झुंड में काम करने वाले अनमैन्ड अंडरवाटर व्हीकल्स (UUVs) यह काम दस गुना तेजी से और बिना किसी मानवीय नुकसान के कर सकते हैं।
इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार करना होगा। इस रणनीति का एक ही नुकसान है: रक्षा कंपनियों के महंगे ठेके बंद हो जाएंगे और राजनेताओं को टीवी पर बड़ी-बड़ी बातें करने का मौका नहीं मिलेगा।
फ्रांस और ब्रिटेन के ये जहाज वहां कोई जंग जीतने नहीं गए हैं। वे केवल एक पुराने ढर्रे को खींच रहे हैं जो आधुनिक युद्धकौशल में अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। जब तक हम समुद्र की सुरक्षा को 80 के दशक के चश्मे से देखना बंद नहीं करेंगे, तब तक हम सिर्फ अरबों डॉलर पानी में बहाते रहेंगे।
अपनी नौसेनाओं को वापस बुलाइए। आसमान और पानी के नीचे की तकनीक को काम करने दीजिए। हॉलीवुड स्टाइल के इस नौसैनिक तमाशे को अब बंद होना चाहिए।